देवहूति पूछें कपिल जी से कि प्रकृति, पुरुष और महतत्व आदि का ! देवहूति पूछें कपिल जी से कि प्रकृति, पुरुष और महतत्व आदि का !
माया मोह से पीछा छूटे और भक्ति और ज्ञान मिल जाये! माया मोह से पीछा छूटे और भक्ति और ज्ञान मिल जाये!
जगत जननी बना के जो पूजते हो मुझे, क्यूं दुत्कारी जाती हूं हर जगह .. जगत जननी बना के जो पूजते हो मुझे, क्यूं दुत्कारी जाती हूं हर जगह ..
हम पर्वतों पे चलते है जो संग है आकाश के, संभल संभल के रखते अपने शब्द हम जबान पे, सामना हो जाए जो छ... हम पर्वतों पे चलते है जो संग है आकाश के, संभल संभल के रखते अपने शब्द हम जबान पे...
राम जी ! आवहु फिर इक बार। मात पिता कौं कंस त्रास दैं पीर को नहि उपचार। राम जी ! आवहु फिर इक बार। मात पिता कौं कंस त्रास दैं पीर को नहि उपचार।
एक धोबी कहे अपनी स्त्री को चली जा, अब नहीं तेरा ये घर । एक धोबी कहे अपनी स्त्री को चली जा, अब नहीं तेरा ये घर ।